जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार बारिश और वैष्णो देवी मार्ग पर भूस्खलन : 11 की मौत, बचाव कार्य तेज़

जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन: वैष्णो देवी यात्रा स्थगित, अब तक 11 की मौत

इस समय भीषण प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। लगातार हो रही जम्मू-कश्मीर में मूसलधार बारिश ने पूरे जम्मू क्षेत्र में तबाही मचा दी है। सबसे बड़ा हादसा त्रिकुटा पहाड़ी पर हुआ, जहाँ माता वैष्णो देवी मंदिर जाने वाले मार्ग पर मंगलवार दोपहर भूस्खलन (landslide) हो गया। इस हादसे में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 7 श्रद्धालु थे। इसके अलावा 14 से अधिक लोग घायल हुए हैं और कई अन्य के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार बारिश
जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार बारिश

जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार बारिश : वैष्णो देवी यात्रा स्थगित

जम्मू-कश्मीर के रियासी ज़िले में स्थित प्रसिद्ध वैष्णो देवी धाम की यात्रा को फिलहाल रोक दिया गया है। भूस्खलन इतना भयानक था कि चट्टानें, बोल्डर और बड़े पत्थर अचानक नीचे गिर पड़े और श्रद्धालु उनकी चपेट में आ गए। यह हादसा अर्धकुंवारी के पास इंदरप्रस्थ भोजनालय के नज़दीक हुआ, जो कटरा से लगभग आधे रास्ते पर स्थित है। सुरक्षा के मद्देनज़र प्रशासन ने यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित कर दी है।

सेना और एनडीआरएफ का रेस्क्यू अभियान

जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार बारिश और बाढ़ जैसे हालात को देखते हुए भारतीय सेना ने मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियान शुरू किया है। सेना ने जम्मू और आसपास के इलाकों में कई रेस्क्यू कॉलम तैनात किए हैं। हेलिकॉप्टरों की मदद से भी बचाव कार्य जारी है।

  • RS पुरा सेक्टर: गढ़ीगढ़ और शेरगढ़ इलाकों में कई लोगों को सुरक्षित निकाला गया।
  • SKUAST यूनिवर्सिटी, जम्मू: छात्रों को इमारतों से निकालने का काम जारी है।
  • मामून सेक्टर: यहाँ हेलिकॉप्टर की मदद से ग्रामीणों और बीएसएफ जवानों को सुरक्षित निकाला गया।
  • नद गाँव और मकौरा गाँव: नावों और पुलिस बोट्स के जरिए दर्जनों परिवारों को बाढ़ से बचाया गया।
  • अब तक सैकड़ों लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जा चुके हैं, लेकिन कई इलाकों में पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है।

स्कूल, दफ्तर बंद – नदियाँ खतरे के निशान पर

जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार बारिश  के चलते जम्मू प्रशासन ने आदेश जारी किया है कि सभी स्कूल, कॉलेज और दफ्तर बंद रहेंगे। केवल ज़रूरी सेवाएँ जैसे स्वास्थ्य, पुलिस और आपातकालीन विभाग ही काम करेंगे। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 40 घंटे तक जम्मू संभाग में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इस समय बसान्तर, तवी और चिनाब नदियाँ अलर्ट लेवल पर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार बारिश :सड़कों और रेल यातायात पर असर

बारिश और भूस्खलन की वजह से जम्मू-श्रीनगर और किश्तवाड़-डोडा नेशनल हाईवे पर यातायात रोक दिया गया है। कई आंतरिक सड़कें और पुल टूट गए हैं।रेलवे ने सुरक्षा के मद्देनज़र कटरा, उधमपुर और जम्मू जाने वाली लगभग 18 ट्रेनों को रद्द कर दिया है। इनमें कटरा-दिल्ली वंदे भारत और श्री शक्ति एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनें भी शामिल हैं।

टेलीकॉम और इंटरनेट सेवाएँ बाधित

भारी बारिश और भूस्खलन के कारण टेलीकॉम फाइबर नेटवर्क को नुकसान हुआ है। कई जगह कॉल और इंटरनेट सेवाएँ ठप पड़ी हैं। इस बीच, दूरसंचार विभाग (DoT) ने इंट्रा-सर्कल रोमिंग डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम ने इमरजेंसी में अतिरिक्त नेटवर्क सपोर्ट चालू किया है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में लोग बिना रुकावट कॉल और मैसेज कर सकें। यह अस्थायी सुविधा फिलहाल अगले कुछ दिनों तक लागू रहेगी।

मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्थिति को “गंभीर“ बताया है और श्रीनगर से जल्द ही जम्मू रवाना होने की घोषणा की है। उन्होंने केंद्र सरकार से मदद मांगी है।गृहमंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर कहा कि यह हादसा बेहद दुखद है और एनडीआरएफ की टीमें जल्द ही घटनास्थल पर पहुँच रही हैं। उन्होंने गृहमंत्री ने मुख्यमंत्री व उपराज्यपाल से संपर्क साधकर राहत अभियान की जानकारी ली।

जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार बारिश :उत्तर भारत में भी असर

जम्मू-कश्मीर के अलावा उत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। पहाड़ी इलाकों में कई जगह सड़कें बह गई हैं, पुल टूट गए हैं और मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। हिमाचल और उत्तराखंड के साथ-साथ पंजाब के कुछ ज़िलों में भी नदी-नाले उफान पर हैं।

निष्कर्ष

जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन ने एक बार फिर दिखा दिया है कि प्राकृतिक आपदाएँ कितनी विनाशकारी हो सकती हैं। इस वक्त सबसे बड़ी प्राथमिकता फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालना और ज़रूरतमंदों तक मदद पहुँचाना है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी किनारों और संवेदनशील इलाकों से दूर रहें। श्रद्धालुओं और आम नागरिकों के लिए सुरक्षा इंतज़ाम लगातार किए जा रहे हैं।

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