अफगानिस्तान में आया तेज भूकंप 2025 : धरती डोली, भारत के कई राज्यों में लोग घरों से बाहर निकले
नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क। रविवार देर रात अफगानिस्तान में आया तेज भूकंप 600 से अधिक लोगों की मौत, 1500 घायल हुए | भूकंप ने एक बार फिर लोगों को दहशत में डाल दिया। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 6.3 दर्ज की गई। झटके इतने तेज थे कि पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और भारत के कई हिस्सों तक इसका असर महसूस किया गया। दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, गाजियाबाद और जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में लोग आधी रात को घरों से बाहर निकल आए। राहत की बात यह है कि अब तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

भूकंप का केंद्र
अफगानिस्तान में आया तेज भूकंप : 31 अगस्त की रात थी। पहाड़ों की गोद में बसे गांवों में सन्नाटा पसरा था, और लोग दिनभर की थकान के बाद गहरी नींद में थे। रात 11:47 पर प्रकृति ने चेताया। हिंदू कुश की गहराइयों से उठे झटके ने सपनों को तोड़ा और लोगों को हकीकत की दहशत में ला खड़ा किया। कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा के पास बसे गांवों की साँसें थम गईं। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, इस शक्तिशाली भूकंप का केंद्र सतह से मात्र 10 किलोमीटर नीचे था—इतना उथला कि इसकी गूंज भारत के कई हिस्सों तक महसूस की गई।
भारत में विशेषकर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में लोग भूकंप के झटके महसूस करते ही सतर्क हो गए। दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में इमारतों के हिलने की वजह से लोग आधी रात को घरों से बाहर निकल आए। भूकंप की अवधि छोटी थी, लेकिन इसकी शक्ति ने लोगों को घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान की स्थिति
पाकिस्तान मौसम विज्ञान विभाग (PMD) ने जानकारी दी कि भूकंप के झटके इस्लामाबाद, रावलपिंडी, पेशावर और स्वात तक महसूस किए गए। कई शहरों में इमारतें हिलने लगीं और लोग घरों से बाहर निकल आए। वहीं, अफगानिस्तान के नांगरहार प्रांत के स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि की कि अब तक 15 लोग घायल हुए हैं, अफगानिस्तान में आया तेज भूकंप ,जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
एक महीने में पांचवीं बार भूकंप
विशेषज्ञों के अनुसार, अफगानिस्तान में आया तेज भूकंप भूकंपीय रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। यहां बार-बार भूकंप आते रहते हैं। बीते एक महीने में यह पांचवीं बार है जब वहां तेज झटके दर्ज किए गए।
- 8 अगस्त – 4.3 तीव्रता का भूकंप
- 13 अगस्त – 4.2 तीव्रता
- 17 अगस्त – 4.9 तीव्रता
- 27 अगस्त – 5.4 तीव्रता
- 1 सितंबर (रविवार रात) – 6.3 तीव्रता लगातार आ रहे झटकों से स्थानीय लोगों में डर का माहौल बना हुआ है।
क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी सात बड़ी प्लेटों पर टिकी हुई है, जो लगातार गतिशील रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं या खिसकती हैं, तो ऊर्जा बाहर निकलती है और इसी से भूकंप उत्पन्न होता है।
- जब दबाव कम होता है तो झटके मामूली रहते हैं।
- दबाव ज्यादा होने पर कंपन तीव्र हो जाते हैं और बड़ी तबाही ला सकते हैं।
- भूकंप की तीव्रता का पैमाना
- भूकंप की शक्ति रिक्टर स्केल पर मापी जाती है।
- 3 से कम – हल्के झटके, अक्सर महसूस नहीं होते।
- 4 से 5 – इस रेंज में इमारतों की खिड़कियां प्रभावित हो सकती हैं और सतह पर हल्की दरारें बन सकती हैं।
- 6 से 7 – इमारतों को नुकसान, नींव दरक सकती है।
- भूकंप ने शहर हिलाया, दीवारें टूटी, लोग डरे।
- 8 से अधिक – बेहद खतरनाक, सुनामी की आशंका।
- 3 तीव्रता का भूकंप काफी शक्तिशाली माना जाता है और दूर-दराज तक असर दिखाता है।
- 1. टेक्टोनिक प्लेट्स की गति
पृथ्वी की सतह कठोर टुकड़ों में बंटी होती है जिन्हें प्लेट्स कहते हैं। ये प्लेट्स लगातार हिलती रहती हैं। कभी-कभी ये प्लेट्स एक-दूसरे से टकराती हैं, कभी दूर जाती हैं, और कभी एक के नीचे दूसरी सरक जाती है। इस गति के कारण जमीन के अंदर दबाव बनता है।
- दबाव का निर्माण
जहाँ प्लेट्स टकराती हैं, वहाँ पर वर्षों तक दबाव जमा होता है। यह दबाव तब तक बढ़ता रहता है जब तक कि प्लेट्स इसे सहन नहीं कर पातीं। यह एक तरह से प्राकृतिक तनाव का निर्माण करता है।
- ऊर्जा का अचानक मुक्त होना
जब प्लेट्स के बीच जमा दबाव सहन की सीमा पार कर जाता है, तो यह अचानक बाहर निकलता है। यह ऊर्जा जमीन में भूकंपीय तरंगों के रूप में फैलती है, जिसे हम भूकंप के झटकों के रूप में महसूस करते हैं।
- फॉल्ट लाइन का टूटना
भूकंप का अधिकांश कारण फॉल्ट लाइन होती है। फॉल्ट लाइन दरारें होती हैं जो पृथ्वी की सतह के नीचे स्थित होती हैं। जब दबाव ज्यादा हो जाता है और ये दरारें टूटती हैं, तो तेज झटके उत्पन्न होते हैं। इसी कारण से भूकंप का केंद्र अक्सर फॉल्ट लाइन के पास होता है।
- 5. ज्वालामुखीय गतिविधि
कुछ भूकंप ज्वालामुखी फटने या लावा प्रवाह के कारण भी आते हैं। जब ज्वालामुखी के अंदर गैस और मैग्मा अचानक बाहर निकलते हैं, तो जमीन में कंपन पैदा होता है। हालांकि, ऐसे भूकंप आमतौर पर स्थानीय और सीमित प्रभाव वाले होते हैं।
- मृदा धंसना या भूस्खलन
पहाड़ी इलाकों में भारी वर्षा या ढलानों पर मिट्टी के भारी धंसने से हल्के भूकंप के झटके महसूस हो सकते हैं। इसे भूकंप के छोटे झटकों के रूप में दर्ज किया जाता है।
- भूकंपीय तरंगों का फैलाव
भूकंप की ऊर्जा जमीन के अंदर तरंगों के रूप में फैलती है। जब ये तरंगें सतह तक पहुँचती हैं, तो कंपन महसूस होते हैं। झटकों की तीव्रता इस बात पर भी निर्भर करती है कि भूकंप का केंद्र सतह से कितना गहरा था।
- संवेदनशील क्षेत्र
कुछ क्षेत्र भूकंपीय रूप से अधिक संवेदनशील होते हैं। जैसे हिंदू कुश, नेपाल, जापान और कैलिफोर्निया। इन क्षेत्रों में प्लेट्स अधिक सक्रिय रहती हैं और बार-बार भूकंप आते रहते हैं।
- रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता
भूकंप की ताकत और प्रभाव को रिक्टर पैमाने के जरिए मापा जाता है। यह पैमाना 1 से 9 तक होता है, जिसमें संख्या जितनी बड़ी होगी, झटके उतने ही तीव्र और नुकसानदेह माने जाते हैं। उदाहरण स्वरूप:
2-3: हल्का कंपन, ज्यादातर महसूस नहीं होता
4-5: खिड़कियों में हल्की हिलचाल, दरारें
6-7: इमारतों को नुकसान, फर्नीचर गिरना
8 और उससे ऊपर: भारी तबाही, मकान गिर सकते हैं
विशेषज्ञों की चेतावनी
अफगानिस्तान में आया तेज भूकंप भूवैज्ञानिकों का कहना है कि हिंदू कुश क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से सक्रिय जोन है। यहां लगातार झटके महसूस होना इस बात का संकेत है कि धरती की प्लेटों पर दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि आने वाले दिनों में आफ्टरशॉक्स जारी रह सकते हैं।
राहत एजेंसियों की निगरानी
अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत के आपदा विभाग स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। आधिकारिक रूप से किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन प्रशासन ने त्वरित सहायता दल standby पर रखे हैं।
निष्कर्ष
रविवार रात आया 6.3 तीव्रता का भूकंप एक बार फिर यह याद दिलाता है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से सतर्क रहना बेहद जरूरी है। भले ही इस बार बड़ी तबाही से बचाव हो गया हो, लेकिन लगातार झटके इस क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी हैं